किसी आन्दोलन का वर्ग-चरित्र कैसे निर्धारित होता है?
By Abhinav Sinha ________________________________________________ मौजूदा धनी किसान-कुलक आन् दोलन का समर्थन करने वाले कई कम् युनिस् ट संगठन एक तर्क यह दे रहे हैं कि चूंकि इस आन् दोलन में ग़रीब और मंझोले किसानों की एक तादाद भी आ रही है, इसलिए यह ग़रीब और मंझोले किसानों का भी आन् दोलन है। यह तर्क ग़लत है। क् यों? किसी आन् दोलन का चरित्र उसमें आने वाली भीड़ से तय नहीं होता है। जो यह नहीं समझता वह राजनीति और विचारधारा की भूमिका भूल चुका है और भोण् डी भौतिकवादी बात कर रहा है, जो उसी को सच मानता है जो दिखता है। लेकिन जैसा कि मार्क् स ने कहा था, अगर जो दिखता है वही सच होता तो विज्ञान की कोई ज़रूरत नहीं होती। फिर सवाल यह उठता है कि किसी आन् दोलन का वर्ग चरित्र तय कैसे होता है? किसी आन् दोलन का वर्ग चरित्र सबसे पहले उसकी मांगों के चार्टर से तय होता है, जिसका अध् ययन आपको यह बताता है कि वह किन वर्ग हितों की नुमाइन् दगी कर रहा है, उसकी राजनीति क् या है, उसके नेतृत् व का चरित्र क् या है और उसकी विचारधारा क् या है। आन् दोलन में कौन-कौन से वर्गों के जनसमुदाय नुमाइ...