आप तो चैन से सो रहे हैं साहब, उनका क्या जिनका आशिया ना रहा

थानेसर रेलवे स्टेशन के पास बसी झुग्गियों को कुरुक्षेत्र प्रशासन ने ये कह कर उजाड़ दिया यहाँ हम सड़क बनाएँगे

पिछले लम्बे समय से थानेसर रेलवे स्टेशन के पास लगभग 40 से 50 परिवार अपनी झुग्गी-झोंपड़ियाँ बना कर रह रहे थे। लेकिन आज प्रशासन ने उनकी झुग्गी-झोंपड़ियाँ को उजाड़ कर सभी परिवारों को बेघर कर दिया है। देखा जाए तो प्रशासन के इस क़दम ने झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वाली महिलाओं समेत छोटे-छोटे बच्चों को सड़क पर ला खड़ा कर दिया है।

क्या इस ठिठुरती जानलेवा सर्दी में लोगों को झुग्गी-झोंपड़ियों से बेघर कर देने वाला यह क़दम उचित ठहराया जा सकता है? 

वैसे तो 72 साल की आज़ादी के बाद अगर आज भी लोगों को झुग्गी-झोंपड़ियों में रहना पड़ रहा है तो इसमें सभी सरकारों समेत इस व्यवस्था की ही नाकामी कही जाएगी। एक सरकारी आँकड़े के अनुसार आज भी भारत में लगभग 18 करोड़ की आबादी झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने के लिए मजबूर है। चुनाव के समय जो नेता मंत्री इसी जनता से बड़े-बड़े वादे करते हैं लेकिन वही नेता मंत्री सत्ता में आने के बाद इन लोगों को बेघर करने का कारण बनते हैं।

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